जन्म 22 नवम्बर 1830 मृत्यु 04 अप्रैल 1857
झलकारी का शौर्य पराक्रम
जब झांसी में आम हुआ ।
अंग्रेजों की नीद उड़ गई
और आराम हराम हुआ ।।
बाइस, ग्यारह, अट्ठारह सौ
तीस को जन्मी झलकारी ।
अट्ठारह सौ सत्तावन में
कहेर बन गई चिनगारी ।।
तेग उठी जब झलकारी की
सेना मे कोहराम हुआ ।
अंग्रेजों की नीद उड़ गई
और आराम हराम हुआ ।।
पिता सदोवर माता जमुना
पति पूरन जांबाज मिले ।
इन्ही से अंग्रेजों पर भारी
पड़ने के अंदाज मिले ।।
जोभी सामने आया दुश्मन
उसका काम तमाम हुआ ।
अंग्रेजों की नीद उड़ गई
और आराम हराम हुआ ।।
शेर से जब वो लड़ी शेरनी
शेर से छक्के छूट गए ।
जितने डाकू घुसे गांव में
सबके पसीने छूट गए ।।
झलकारी के इस साहस का
चर्चा सुबहो शाम हुआ ।
अंग्रेजों की नीद उड़ गई
और आराम हराम हुआ ।।
झलकारी की झलक देखके
रह ना सकी लक्ष्मी बाई ।
थी हमशक्ल महारानी की
योद्धा झलकारी बाई ।।
बना दिया सेना मे नायक
फिर सेना में काम हुआ ।
अंग्रेजों की नीद उड़ गई
और आराम हराम हुआ ।।
रानी जब घिर गई महल में
तब झलकारी खूब लड़ी ।
बचाके अपनी महारानी को
अंग्रेजों पर टूट पड़ी ।।
चार अप्रैल को मिटी शेरनी
रण वीरों में नाम हुआ ।
अंग्रेजों की नीद उड़ गई
और आराम हराम हुआ ।।
पीठपे जो बेटे को लेके
गोरों से टकराई थी ।
भूला दिया गोगों ने जिसको
वो झलकारी बाई थी ।।
जाने क्यों इतिहास में ये
बेचैन नाम गुमनाम हुआ ।
अंग्रेजों की नीद उड़ गई
और आराम हराम हुआ ।।
पता-संकटा देवी बैंड मार्केट लखीमपुर
खीरी