साहित्य

  • जन की बात न दबेगी, न छिपेगी, अब छपेगी, लोकतंत्र के सच्चे सिपाही बनिए अपने लिए नहीं, अपने आने वाले कल के लिए, आपका अपना भविष्य जहाँ गर्व से कह सके आप थे तो हम हैं।
  • लखीमपुर-खीरी उ०प्र०

Saturday, June 12, 2021

बर्बाद होते देश को बचाओ -जसवन्त कुमार

और कितना? 

बिकने देना है, इस देश को-

कब संभालोगे अपने होश को,

अब तो बहकावे में न आओ-

बर्बाद होते देश को बचाओ 

 

तुम्हारी नासमझी क्या खूब रंग लाई है,

बेरोजगारी और महंगाई भी संग लाई है,

अब तो  अच्छे दिन को ठुकराओ-

बर्बाद होते देश को बचाओ 

 

वर्तमान, जो भूत है न भविष्य

वह क्या? सवाँरेगा देश का भविष्य

अब तो अपने बच्चों को पढ़ाओ-

बर्बाद होने से देश को बचाओ ।

 

हे मेरे पिछड़े समाज के लोगों

तुमसे कहता हूं- मैं, कुछ आज-

अब अपने में बदलाव लाओ

बर्बाद होते देश को बचाओ 

 

पता-सरवा टापर पिपरा गूम जिला-लखीमपुर खीरी

पढ़िये आज की रचना

मौत और महिला-अखिलेश कुमार अरुण

(कविता) (नोट-प्रकाशित रचना इंदौर समाचार पत्र मध्य प्रदेश ११ मार्च २०२५ पृष्ठ संख्या-1 , वुमेन एक्सप्रेस पत्र दिल्ली से दिनांक ११ मार्च २०२५ ...

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