कश्तियों के वास्ते, मझधार अब ये बेटियां।
इस जमाने में भला ,उस बाप को निद्रा कहां।
ब्याह के काबिल हुईं, तैयार अब ये बेटियां।।
मुल्क के आईन ने हर, जर पे इनको हक दिया।
मांगती कब पापा से, अधिकार अब ये बेटियां।।
कहने को विद्वान हैं जो ,इल्म के हैं बादशा।
बिन दहेजों के कहां ,स्वीकार अब ये बेटियां।।
हुस्न के बाजार में, किरदार की कीमत कहां ।
हर गुणों से युक्त हैं ,बेकार अब ये बेटियां।।
पूछते हैं लोग हम से ,हैं दिए तहजीब क्या।
है तेरी तहजीब, ना इकरार अब ये बेटियां।।
कर लिया पत्थर कलेजा ,गौतम उस दिन बाप ने।
छोड़ कर जो रहीं, घर-बार अब ये बेटियां ।।