साहित्य

  • जन की बात न दबेगी, न छिपेगी, अब छपेगी, लोकतंत्र के सच्चे सिपाही बनिए अपने लिए नहीं, अपने आने वाले कल के लिए, आपका अपना भविष्य जहाँ गर्व से कह सके आप थे तो हम हैं।
  • लखीमपुर-खीरी उ०प्र०

Wednesday, June 09, 2021

ग़ज़ल ( नन्दी लाल)

नन्दी लाल
तमाम उम्र तमाशा हुआ    इसी के लिए।

तुम्हारे होंठ पर बिखरी हुई हँसी के लिए।।

रहेगा याद बहुत साल बेरुखी के लिए,

मसाला खूब मिला यार शायरी के लिए।।

हसीन ख्वाब ,सँजोए हुए खुशी के लिए,

उधार माँग कर लाया हूँ  जिंदगी के लिए।।

दिलों में प्यार का दीपक सदा जलाए रहे,

यह जरूरी नहीं है आज आदमी के लिए।।

मिटा दे लाख अँधेरे सभी राहों के यहाँ,

चिराग एक ही काफी है रोशनी के लिए।।

करो न और भरोसा बड़ा चालाक है वह,

खड़ा है द्वार पे दरबान तस्करी के लिए।।

बताएँ किस से कहें क्या क्या कहें कैसे कहें,

गए हैं भाग जो परदेस    कलमुही के लिए।।

छिनी मजदूर के हाथों की रोटियाँअब तो ,

बहुत निराश हो बैठा है खुदकशी के लिए।।

पता-गोला, लखीमपुर-खीरी

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