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नन्दी लाल |
उम्र भर यह वबा का साल तुझे।
याद आएगा बहरहाल
तुझे।।
मर गया वह गरीब था घर का,
उसके मरने प क्या मलाल तुझे।।
रोज करता नए दिखावे है,
उसके अच्छे लगे कमाल तुझे।।
बैठकर काढ़ कसीदे उस पर,
दे गया वो नया रुमाल तुझे।।
क्यों खड़ा ताक रहा साहब को,
याद आया कोई सवाल तुझे।।
लोन खाता था रोज रोटी पर,
आज अच्छी न लगे दाल तुझे।।
राज महलों में क्या नहीं
होता,
झोपड़ी का दिखा बवाल तुझे।।
आँसुओं को सुखा के बैठा है,
पीटना आ गया है गाल तुझे।।
बेवजह शे'र लिख रहा ऐसी,
हो गया क्या है नंदीलाल
तुझे।।
निवास-गोला गोकर्णनाथ खीरी