साहित्य

  • जन की बात न दबेगी, न छिपेगी, अब छपेगी, लोकतंत्र के सच्चे सिपाही बनिए अपने लिए नहीं, अपने आने वाले कल के लिए, आपका अपना भविष्य जहाँ गर्व से कह सके आप थे तो हम हैं।
  • लखीमपुर-खीरी उ०प्र०

Wednesday, June 02, 2021

ग़ज़ल (नन्दी लाल)

  

 नन्दी लाल

उम्र भर यह वबा का साल तुझे।

 याद आएगा    बहरहाल  तुझे।।

 

मर गया वह गरीब था घर का,

उसके मरने प क्या मलाल तुझे।।

 

 रोज करता नए    दिखावे है,

 उसके अच्छे लगे कमाल तुझे।।

 

 बैठकर काढ़ कसीदे उस पर,

 दे गया वो नया रुमाल तुझे।।

 

 क्यों खड़ा ताक रहा साहब को,

 याद आया कोई सवाल तुझे।।

 

 लोन खाता था रोज रोटी पर,

 आज अच्छी न लगे दाल तुझे।।

 

 राज महलों में क्या नहीं होता,

 झोपड़ी का दिखा बवाल तुझे।।

 

 आँसुओं को सुखा के बैठा है,

 पीटना आ गया है गाल तुझे।।

 

 बेवजह शे'र लिख रहा  ऐसी,

 हो गया क्या है नंदीलाल तुझे।।

 


निवास-गोला गोकर्णनाथ खीरी

पढ़िये आज की रचना

मौत और महिला-अखिलेश कुमार अरुण

(कविता) (नोट-प्रकाशित रचना इंदौर समाचार पत्र मध्य प्रदेश ११ मार्च २०२५ पृष्ठ संख्या-1 , वुमेन एक्सप्रेस पत्र दिल्ली से दिनांक ११ मार्च २०२५ ...

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