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Tuesday, June 22, 2021

विवादों को दरकिनार कर अनुप्रिया पटेल ने मां कृष्णा पटेल के लिए मांगी एमएलसी सीट: खबर की सच्चाई पर सामाजिक-राजनैतिक विश्लेषण: -एसोसिएट प्रोफ़ेसर एन०एल० वर्मा

-----------------------हिंदुस्तान में छपी खबर------------------------------------------
       प्रदेश व केंद्र सरकार में भाजपा की सहयोगी अनुप्रिया पटेल की अगुवाई वाले अपना दल (सोनेलाल) ने विधान परिषद में खाली हो रही मनोनीत क्षेत्र के चार (एमएलसी सीटें) सदस्यों में से एक सदस्य पद देने की मांग की है। अपना दल (एस) ने प्रदेश भाजपा के शीर्ष नेताओं के सामने अपनी यह मंशा जाहिर कर दी है। पार्टी सारे विवादों को किनारे रखकर स्व. सोनेलाल पटेल की पत्नी कृष्णा पटेल को एमएलसी बनाना चाहती है, ताकि  विधानसभा चुनाव में पार्टी परिवार की पूरी एकता के साथ जनता के बीच नजर आए।
     अनुप्रिया पटेल की पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने भाजपा के शीर्ष नेताओं को यह समझाने का प्रयास किया है कि इसका लाभ विधान सभा चुनाव के दौरान राज्य में एनडीए के सभी प्रत्याशियों को मिलेगा। कृष्णा पटेल के साथ आ जाने से विपक्षियों को चुनाव में पटेल समाज को दिग्भ्रमित करने का मौक़ा भी नहीं मिलेगा। मिली जानकारी के मुताबिक कृष्णा पटेल के नाम पर सहमति न बनने की स्थिति में अपना दल (एस) स्व. डा. सोनेलाल पटेल के राजनैतिक सहयोगी रहे किसी पुराने कुर्मी नेता को विधान परिषद में भेजना चाहेगी। विधान परिषद में सपा के चार मनोनीत सदस्यों का कार्यकाल पांच जुलाई को समाप्त हो रहा है।
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खबर की सच्चाई पर सामाजिक-राजनैतिक विश्लेषण: -एसोसिएट प्रोफ़ेसर एन०एल० वर्मा
नन्द लाल वर्मा (एसोसिएट प्रोफेसर)
9415461224,8858656000
       अनुप्रिया पटेल ने बीजेपी के सामने पारिवारिक एकता और एनडीए के राजनैतिक लाभ की दुहाई देकर बीजेपी पर राजनैतिक दबाव/सौदेबाज़ी का एक बड़ा दांव चल दिया है। "एक तीर से दो शिकार" की कहावत चरितार्थ हो सकती है। यदि ऐसा होता है तो "देर आये दुरुस्त आये" की कहावत भी चरितार्थ होती नजर आएगी। यदि ऐसा करने में अनुप्रिया पटेल सफल हो जाती हैं तो एक तरफ पारिवारिक सौहार्द् की वापसी होने की प्रबल संभावना  और दूसरे गुट के राजनैतिक आधार का लाभ भी बीजेपी को मिलने के साथ उनकी मां को अथवा डॉ. सोने लाल पटेल के किसी पुराने कुर्मी सहयोगी को अपना दल विधान परिषद में भेजने में सफल हो जाएगा। यदि कृष्णा पटेल को अनुप्रिया पटेल का यह प्रस्ताव स्वीकार्य नहीं होता है तो सोने लाल पटेल के किसी पुराने राजनैतिक कुर्मी नज़दीकी को विधान परिषद में भेजकर कृष्णा पटेल गुट में सामाजिक-राजनैतिक सेंध लगाने का एक अप्रत्यक्ष प्रयास कुछ सीमा तक सफल हो सकता है और साथ ही पारिवारिक-राजनैतिक सौहार्दता और एकता पुनर्जीवित करने की अपनी राजनैतिक पहल के संदेश को  चुनाव के समय कुर्मी समाज के सामने पूरी संवेदनाओं,भावनाओं और पूरी दमदारी के साथ पेश कर सकती हैं जिसका तात्कालिक राजनैतिक लाभ अपना दल (एस) को मिल सकता है।उल्लेखनीय है कि बीजेपी की सहयोगी और विधानसभा चुनाव 2022 में भी अनुप्रिया पटेल के बीजेपी के साथ जाने की पूर्ण संभावना को देखते हुए अपना दल के दूसरे गुट(कृष्णा पटेल) की नेता और अनुप्रिया पटेल की बहन पल्लवी पटेल भी राजनैतिक अवसर की तलाश में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से संपर्क साध चुकी हैं।अनुप्रिया पटेल की इस पारिवारिक सौहार्दता और राजनैतिक उदारता पल्लवी पटेल की अखिलेश यादव से हुई राजनैतिक मुलाकात की परिणिति तो नही है?
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