साहित्य

  • जन की बात न दबेगी, न छिपेगी, अब छपेगी, लोकतंत्र के सच्चे सिपाही बनिए अपने लिए नहीं, अपने आने वाले कल के लिए, आपका अपना भविष्य जहाँ गर्व से कह सके आप थे तो हम हैं।
  • लखीमपुर-खीरी उ०प्र०

Wednesday, June 09, 2021

ग़ज़ल-ओमप्रकाश गौतम

मिसाल क्या दूं मैं जो , बेमिसाल थे बिरसा।

कमाल क्या कहूं जो , बाकमाल थे बिरसा ।

करूं सौ बार नमन मैं, तेरी शहादत को ।

पिता थे सुगना मां करमी, के लाल थे बिरसा।।

मिले तालीम हर एकआदिवासी को कैसे।

हर एक फिक्र का रखतेमलाल थे बिरसा ।।

 खिलाफ जुर्म के थे,  जो लड़े हुकूमत से ।

बेबस गरीब लाचारों की,  ढाल थे बिरसा ।।

जमीन जल तथा जंगल, से है मेरा नाता ।

लगाये नजर जो ऐसों के , काल थे बिरसा ।।

दिये हैं जान वतन के,  जो वास्ते गौतम ।

शहीदों में भी वो तो , चन्द्रभाल थे बिरसा।।

 


ओमप्रकाश गौतम (निरीक्षक)

उत्तर प्रदेश पुलिस 9936358262

No comments:

पढ़िये आज की रचना

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग: उच्च शिक्षा संस्थानों में समता संवर्धन विनियमन:2026 Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations-प्रो.नन्द लाल वर्मा (सेवानिवृत्त)

नन्दलाल वर्मा (सेवानिवृत्त एसोसिएट प्रोफेसर) युवराज दत्त महाविद्यालय लखीमपुर-खीरी 9415461224.        भारतीय संविधान के अनुच्छेद-14 में वर्णि...

सबसे ज्यादा जो पढ़े गये, आप भी पढ़ें.