साहित्य

  • जन की बात न दबेगी, न छिपेगी, अब छपेगी, लोकतंत्र के सच्चे सिपाही बनिए अपने लिए नहीं, अपने आने वाले कल के लिए, आपका अपना भविष्य जहाँ गर्व से कह सके आप थे तो हम हैं।
  • लखीमपुर-खीरी उ०प्र०

Monday, May 31, 2021

अगड़म- बगड़म चित्र बनाते

अगड़म- बगड़म चित्र बनाते


कुछ उजले कुछ  काले  बादल,

अजब- गजब मतवाले बादल ।

कहाँ- कहाँ से उड़- उड़ आते,

अगड़म- बगड़म चित्र बनाते  ।

 

हिम्मत  वाले  सारे   बादल,

बरखा के गुण खूब बताते  ।

अजब- गजब वह शोर मचाते,

खेतों में हरियाली   लाते  ।

 

चित्रकार बनकर वह नभ में,

मनमोहक चित्र खूब बनाते ।

उमड़- घुमड़कर नभ से बादल,

पेड़ों को जल से   नहलाते ।

 

सूखे  ताल- तलैया भरकर,

अगड़म- बगड़म शोर मचाते ।

नदियों को भरकर  इठलाते

गाते,  सागर में मिल जाते  ।


-डॉ. सतीश चन्द्र भगत



निदेशक- हिन्दी बाल साहित्य शोध संस्थान, बनौली, दरभंगा (बिहार) -847428

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