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-डॉ. सतीश चन्द्र भगत |
कुछ उजले कुछ काले बादल,
अजब- गजब मतवाले बादल।
कहाँ- कहाँ से उड़- उड़ आते,
अगड़म- बगड़म चित्र बनाते।
हिम्मत वाले
सारे बादल,
बरखा के गुण खूब बताते।
अजब- गजब वह शोर मचाते,
खेतों में हरियाली लाते।
चित्रकार बनकर वह नभ में,
मनमोहक चित्र खूब बनाते।
उमड़- घुमड़कर नभ से बादल,
पेड़ों को जल से नहलाते।
सूखे ताल- तलैया भरकर,
अगड़म- बगड़म शोर मचाते।
नदियों को भरकर इठलाते
गाते, सागर में
मिल जाते।
लेखक
निदेशक हैं, हिन्दी बाल साहित्य शोध संस्थान,
बनौली, दरभंगा
(बिहार) -847428