गूटुरू
गूं कबूतर बोले,
हुआ
सबेरा तुम क्यों सोए ।
सूरज
की किरणें खिड़की पर,
तुम
क्यों अब सपने में खोए ।
सुबह-
सबेरे जो उठ जाए,
आलस
भी उससे डर जाए ।
बड़े
लगन से दिनभर अपने,
कामों
में भी वे जुड़ जाए ।
प्रतिदिन
आगे बढ़ते हुए,
अपना
जीवन सफल बनाए ।
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-डॉ. सतीश चन्द्र भगत |
निदेशक--
हिन्दी बाल साहित्य शोध संस्थान, बनौली,
दरभंगा (बिहार) -847428