साहित्य के नवांकुर
उज्ज्वल भविष्य की कामनाओं के साथ पहली कविता प्रकाशित है.
ये कैसी हवा चली, सुनसान हो गया-
सारा शहर और गली ।
कुछ तो बात है इस राज में,
जो उम्मीद की हमने वह व्यवस्था न मिली ।।
पानी बिन सूख गए-
खिलने से पहले, कितने फूल और कली ।
जो लोगों की जान बचाते थे,
वही दे रहे हैं- इंसानों की बली ।।
कोई दवी -देवताओं से उम्मीद लगाये बैठा है,
तो कोई कहता है-ठीक कर देगा मेरा अली ।
ये कैसी हवा चली सुनसान हो गया,
सारा शहर और गली ।
जसवन्त कुमार (बी०ए० द्वितीय वर्ष)
ग्राम-सरवा पोस्ट-पिपरागूम
जिला-लखीमपुर