साहित्य

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  • लखीमपुर-खीरी उ०प्र०

Friday, May 21, 2021

चाय से शियासत तक

चाय से शियासत तक 


लेखक-अखिलेश कुमार 'अरुण'

आज अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस है जिसे 2005 से मनाया जा रहा है, इस दिन चाय दुनियाभर में सुर्खियों में रहती है। लेकिन आपको शायद ही पता हो की करीब दो साल पहले तक दुनियाभर में 15 दिसबंर को अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस मनाया जाता था और अब 21 मई को मनाया जाने लगा है। हैरान हो गए ना कि आखिर माजरा क्या है? तो बता दें कि इसके पीछे भारत की अहम भूमिका है। क्योंकि भारत ने ही चाय को उसका हक दिलाया है। दरअसल, दुनियाभर में चाय उत्पादक देश 2005 से 15 दिसंबर को हर साल अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस मनाते रहे हैं। क्योंकि तब तक इसे संयुक्त राष्ट्र की ओर से मान्यता नहीं दी गई थी। इसे लेकर भारत सरकार ने बड़ी पहल की और  2015 में संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन के माध्यम से आधिकारिक तौर पर अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा। जिसे स्वीकार कर लिया गया तबसे यह 21 मई को मनाया जाने लगा गया। 
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विश्व के सभी पेय पदार्थों में से एक सबका पसंदीदा, हमारा तो पुछिए मत..... ऐसा समझ लिजिए चाय का और हमारा चोली दामन का साथ है....बस चाय है तो सब कुछ है....इस कोरोनाकाल में चाय की इमेज कुछ सुधर गई डाक्टरों ने कहा दिन में तीन-चार बार चाय पीजिये गले की खरास दूर होगी और मानसिक तनाव कम होगा। चाय की सारी भ्रांतियाँ धरी की धरी रह गई कोको कोला, पेप्सी, मिरांडा अब अब अपने दिन बहुरने के बाट जोह रहे हैं.....कभी चाय की  चुस्की कम बुराई ज्यादा गिनाई जा रही थी....चाय की इतनी छिछालेदर किसी भी देश के प्रधानमंत्रीत्व काल में  नहीं हुई जितनी की मोदी जी के २०१४ से चाय बेचने को लेकर की गई, बड़प्पन भी खूब हाथ लगा चाय बेचने वाले  अपने को प्रधानमंत्री का सहोदर मानने लगे थे।

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चाय का अपना स्टेंडर्ड है अमीरों की चाय से लेकर गरीबों की चाय तक अपने कई रूपों में पी और पीलाई जाती है... काली चाय, भूरी चाय( दूध कम और परिवार लम्बा) पानी कम दूध की चाय, खालिस दूध की चाय, मसाला चाय, नींबू चाय, हरी चाय.....मने पुछिए मत भिन्न भिन्न वेराइटी में उपलब्ध है। इन सभी चायों में से हमें खलिश दूध की चाय बहुत अच्छी लगती है। बड़े होटलों का चाय पिने के लिए मौका तलाश रहा हूँ जिसमें चीनी,चाय,दूध और गरम पानी सब अलग-अलग होता है....कोई साथ देने वाली मिल जाए तब....आनंद लिया जायेगा।

किसी भी लोकतांत्रिक देश में सत्ता परिवर्तन में चाय की अहम भूमिका है.....चाय पर चर्चा तो सुने ही होंगे....नाम पर मत जाइए/चर्चा चाय पर नहीं होगी गली-नुक्कड़ की दुकानों से लेकर रेस्टोरेंट और सियासत की शतरंज तक चाय की आड़ में चर्चा देश के पंचवर्षीय भविष्य पर होता जहां से आप 70 साल बनाम 7 साल की बाउंड्री रेखा के इधर और उधर का सहज मूल्यांकन कर सकते हैं। इन 70 साल बनाम 7 साल में क्या खोया क्या पाया पर गंभीरता से बिचार किया जाय तो ऐसा समझ लीजिये सब कुछ चाय में चला गया.....अब देश के लिए बचा है तो बस  बाबा जी का ठुल्लू....सोचिये एक  गंभीरता से आपकी अंतरात्मा भी बोल उठेगी।
चाय का अहम रोल है व्यक्ति के जीवन में चाय की चुस्की से आप अपने पारिवारिक जीवन की शुरुआत करते हैं फिर तो पीना ही है....... चुस्की जम गई जीवन आनन्ददायक है नहीं तो.....? इसलिए चाय है तो आशिकों के लिए जान है/हम सबके लिए जहान है।

अखिलेश कुमार अरुण
21/05/2021

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