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Tuesday, January 04, 2022

नीट में ईडब्ल्यूएस के 10% आरक्षण के प्रति केंद्र की कही जाने वाली ओबीसी सरकार की तत्परता और उदारता की एक झलक-नन्द लाल वर्मा (एसोसिएट प्रोफेसर)

एक विमर्श जिस पर आप भी विचार कीजिये ........ 

ओबीसी और एससी-एसटी वर्ग के जागरूक लोग इसका निहितार्थ समझकर सामाजिक जागरूकता फैलाने का प्रयास करें.... बता दें कि केंद्र सरकार ने 25 नवंबर 2021 को सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि आठ लाख रुपये तक सालाना आय की सीमा तय करने पर उठाए गए सवालों को लेकर वह एक एक्सपर्ट कमेटी बनाएगी जो एक महीने में सिफारिश देगी........................!
एन.एल वर्मा (एसोसिएट प्रोफेसर)
      केंद्र सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) की पहचान के लिए पूर्वनिर्धारित मौजूदा वार्षिक आय सीमा आठ लाख रुपये के साथ उनका आरक्षण जारी रखने का फैसला किया है। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दायर एक हलफनामे में केंद्र सरकार ने बताया है कि मानदंडों के पुनर्मूल्यांकन के लिए सरकार द्वारा गठित समिति ने सुझाव दिया है कि मौजूदा मानदंडों को इस साल की काउंसलिंग और प्रवेश के लिए आरक्षण जारी रखा जा सकता है। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने बताया है कि आठ लाख रुपए वार्षिक तक की आय वर्ग वाले सवर्ण अभ्यर्थियों को मेडिकल कोर्स में NEET(नीट) की हुई परीक्षा में 10% आरक्षण देते हुए दाखिला देना चाहती है। उल्लेखनीय है कि संविधान के सामाजिक न्याय के लिए सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े ओबीसी के आरक्षण के लिए भी यही आठ लाख की सीमा निर्धारित है।

       दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में शनिवार को दायर एक हलफनामे में केंद्र सरकार ने समिति की एक रिपोर्ट की एक प्रति भी संलग्न की है। इसके साथ ही बताया गया है कि केंद्र सरकार ने समिति की सिफारिशों को स्वीकार करने का निर्णय लिया है, जिसमें नए मानदंडों को संभावित रूप से लागू करने की सिफारिश भी शामिल है। पूर्व वित्त सचिव अजय भूषण पांडे, सदस्य सचिव आईसीएसएसआर वीके मल्होत्रा ​​और प्रधान आर्थिक सलाहकार संजीव सान्याल की तीन सदस्यीय समिति ने 31 दिसंबर को केंद्र को रिपोर्ट सौंपी थी।

       हालांकि, इस समिति द्वारा केंद्र सरकार को सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में बताया गया है कि समिति इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि मौजूदा वार्षिक आय आठ लाख रुपये का मानदंड अधिक समावेशी नहीं है। केंद्र सरकार ने इसी कमेटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि कोर्ट इसे कम से कम इस साल के लिए मंजूरी दे तो मेडिकल में दाखिले के लिए काउंसिलिंग शुरू की जाए। साथ ही केंद्र सरकार ने यह भी कहा है कि अगले सत्र से ईडब्ल्यूएस के मापदंडों में बदलाव किया जा सकता है। इस मामले पर 6 जनवरी को सुनवाई होनी है।
       सरकार ने जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुआई वाली पीठ को बताया है कि याचिकाएं दाखिल होने के बाद कोर्ट ने उन पर सुनवाई करते हुए काउंसिलिंग पर रोक लगा रखी है, इसलिए अब मौजूदा नियम शर्तों और मापदंडों पर काउंसलिंग की इजाजत दी जाए। अगले सत्र के लिए इनमे कमेटी समुचित व्यावहारिक बदलाव कर देगी। यानी ईडब्ल्यूएस आरक्षण के लिए बुनियादी शर्तों में निजी मकान, घरेलू संपत्ति आदि के मुद्दों पर भी एक्सपर्ट कमेटी समुचित अध्ययन कर अपनी सिफारिशें देगी।

       बता दें कि केंद्र सरकार ने 25 नवंबर 2021 को सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि आठ लाख रुपये तक सालाना आय की सीमा तय करने पर उठाए गए सवालों को लेकर वह एक एक्सपर्ट कमेटी बनाएगी जो एक महीने में सिफारिश देगी और फिर काउंसिलिंग की जाएगी। केंद्र ने 30 नवंबर को वित्त सचिव अजय भूषण पांडे की अगुआई में कमेटी बनाई। इसमें अन्य सदस्य ICSSR (इंडियन कॉउंसिल ऑफ सोसियल साइंस रिसर्च) के सदस्य सचिव प्रोफेसर वीके मल्होत्रा और सरकार के प्रमुख वित्तीय सलाहकार संजीव सान्याल हैं।

        ओबीसी और एससी-एसटी के सामाजिक न्याय के प्रति जागरूक शिक्षित साथियों से अनुरोध है कि बार बार ओबीसी कही जाने वाली केंद्र सरकार में बैठाए गए ओबीसी और एससी-एसटी के मुखौटों की वस्तु और मनःस्थिति समझने का प्रयास करें और उसके हिसाब से भविष्य में राजनैतिक/सरकार बनाने के निर्णय लेने के लिए सामाजिक  और राजनीतिक जागरूकता अभियान में यथा संभव सक्रियता बढ़ाएं जिससे मनुवादी मानसिकता से संचालित सरकार और उसमें लगाए या चिपकाए गए ओबीसी और एससी-एसटी के मुखौटों की असलियत समाज के सामने आ सके। यहाँ एक बार पुनः उल्लेखनीय है कि संसद द्वारा ओबीसी के कल्याण के लिए बनी संसदीय समिति के पूर्व चेयरमैन सतना,मध्यप्रदेश से बीजेपी के सांसद श्री गणेश सिंह पटेल जी द्वारा ओबीसी के क्रीमी लेयर के निर्धारण के लिए दी गयी 15लाख रुपए की वार्षिक आय की सीमा (जिसमे कृषि और वेतन की आय शामिल न करने की भी सिफारिश सम्मिलित थी) की सिफारिशें आज भी समिति और सरकार की अलमारियों में कैद है। पिछले वर्ष उनका समिति के चेयरमैन का कार्यकाल खत्म हो जाने के बावजूद किसी सक्षम और योग्य ओबीसी सांसद मुखौटे की तलाश में कई महीनों तक कुर्सी खाली पड़ी रही। लगभग पौन साल बाद ओबीसी के कल्याण के लिए समय समय पर सिफारिश देने वाली इस संसदीय समिति के अध्यक्ष पद पर सीतापुर के सांसद श्री राजेश वर्मा जी को कुर्मी समाज को राजनैतिक रूप से आकर्षित करने के लिए पदस्थापित किया गया। श्री गणेश सिंह पटेल जी के कार्यकाल की सिफारिशें वर्तमान अध्यक्ष जी के सरंक्षण में अलमारियों में बंद आज भी बाहर आने के लिए शायद छटपटा रही होंगी।
पता-लखीमपुर-खीरी उत्तर प्रदेश

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