रोक सके रानी को रण में ऐसा कोई दिखा नही |
झांसी की रानी के आगे योद्धा कोई टिका नही ||
काशी में जन्मी मर्दानी नाम पड़ा लक्ष्मी बाई |
मोरेपंत पिता कहलाए माता भागीरथी बाई ||
जीते जी दुश्मन के आगे रानी का सर झुका नही |
झांसी की रानी के आगे योद्धा कोई टिका नही ||
बचपन सेवो नानाके संग पढ़ी लिखी खेली खाई |
ब्याह हुआ गंगा धर से तो गंगा धर के घर आई ||
युद्ध कला का कौशल कोई रानी से था बचा नही |
झांसी की रानी के आगे योद्धा कोई टिका नही ||
बचपन मे मां को खोया पति और पुत्र जवानी मे |
फिर भी साहस और पराक्रम बना रहा मर्दानी मे ||
दामोदर को गोद लिया है दीप आस का बुझा नही |
झांसी की रानी के आगे योद्धा कोई टिका नही ||
वारिस को वारिस ना माना राज पाट से दूर किया |
अंग्रेजों ने महल छोड़ कर जाने पे मजबूर किया ||
दूरहुआ मजबूर हुआ पर अटल कारवां रुका नही |
झांसी की रानी के आगे योद्धा कोई टिका नही ||
रणचंडी बन खड़ी हुई तो गद्दारों को भी मारा |
अंग्रेजों से खूब लड़ी और हत्यारों को भी मारा ||
जिसपे तेग उठी रानी की वोतो फिर है उठा नही |
झांसी की रानी के आगे योद्धा कोई टिका नही ||
एक जगाह जब रानी का घोडा आके ठहर गया |
तभी जोर का एक वार रानी के सरपे उतर गया ||
वैसे वो हत्यारा जिंदा कहीं किसी को दिखा नही |
झांसी की रानी के आगे योद्धा कोई टिका नही ||
लेआए हैं साथी घायल झांसी वाली रानी को |
लेकिन बचा नही पाए बेचैन वीर मर्दानी को ||
जैसे वो मिट गई देश पर ऐसे कोई मिटा नही |
झांसी की रानी के आगे योद्धा कोई टिका नही ||
कवि श्याम किशोर बेचैन
संकटा देवी बैंड मार्केट लखीमपुर खीरी