साहित्य

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  • लखीमपुर-खीरी उ०प्र०

Saturday, August 21, 2021

दुल्हन नहीं सिर्फ दाई- गोपेंद्र कु सिन्हा गौतम

लघुकथा

 गोपेंद्र कु सिन्हा गौतम
चार भाई और तीन बहनों में चौथे स्थान पर रजिया जन्म से बहुत चुलबुली थी।पूरे मोहल्ले वासियों की लाड़ली थी।सभी लोग रजिया के मुस्कान और तोतली बोली पर फिदा हो जाते थे चाहे कितने भी परेशानी में क्यों न हों!लोग उसे प्यार से रज्जो कहते।
रजिया तितली की भांति फुदकती रहती। शायद ही ऐसा कोई दिन हो जब वह दोनों वक्त का खाना अपने घर में खाई हो।उसके हिरण जैसी सजल आंखें और मोतियों सरीखे बत्तीसी उसकी मुस्कुराहट में चार चांद लगा देते थे।जब हंसती तो सारा मोहल्ला खिलखिला उठता।गांव के लोगों में एक कहावत प्रचलित हो गया था..कोई बीमार क्या, मर भी गया हो तो अगर रजिया खिलखिला कर हंस दे तो वह चीता पर से उठ जाएगा।
विद्यालय में भी रजिया अपने सहपाठियों के साथ-साथ शिक्षक शिक्षिकाओं के बहुत प्रिय थी।जब कभी शिक्षक शिक्षिका या कोई सहपाठी धीरे से भी आवाज लगाता रजिया ओ रजिया,वह बिजली की भांति पहुंच जाती।ऐसा लगता मानो वह पहले से ही आवाज के इंतजार कर रही थी। पर यह क्या आठवीं कक्षा में पहुंचते ही उसकी शादी तय कर दी गई।वह भी एक ऐसे लड़के से जो दोवाह (विदुर) था।इसके बारे में रजिया को किसी ने कुछ बताना लाजमी नहीं समझा।शादी तय हो जाने के बावजूद रजिया पूरे मोहल्ले में स्वच्छंद विचरण करते रहती।उस पर गांव घर की भौजाइयां कहतीं रज्जो अब तुम्हारी शादी होने वाली है वहां जाकर भी इसी तरह से कूदते फांदते रहोगी क्या? रज्जो बिंदास जवाब देती तुम्हारे नंदोई को भी उड़ाना सिखा दूंगी भाभी! शादी के बाद जब रजिया अपने ससुराल पहुंची तो डोली में ही उसकी सास ने गोद में एक पांच वर्षीय बच्ची को डालते हुए बोली लो दुल्हनिया आज से संभालो अपनी बेटी को इसी के लिए हमने  बेटे की दुबारा शादी करवाई है।रजिया समझते देर न लगी कि उसका पति पहले से शादीशुदा है। उसे शक भी हो रहा था क्योंकि उसका पति उम्र में उससे लगभग दोगुने से भी अधिक लगता था। रात को रज्जो ने अपने पति से कहा इस बच्ची को अपने दादी के पास क्यों नहीं भेज देते हो ? इस पर उसके पति ने आंख तरेरते हुए बोला कहां जाएगी तुम्हें किस लिए ब्याह कर लाया हूं ! चेहरा देखने के लिए ? पति के अकड़ भरे जवाब सुन रजिया के आंखों से मोती जैसे आंसू झर झर कर गिरने लगे।वह समझ गई थी प्रकृति ने उसके साथ धोखा किया।उसे दोवाह पति और पहले से ही एक बेटी रहने का कोई गम नहीं था।पर अपने पति के अकड्डू मिजाज ने उसे अंदर तक झकझोर कर रख दिया। स्वच्छंद विचरण करने वाली तितली अब अपना पंख सिकोड लेना है ठीक समझी। शुरू शुरू वह अपने ससुराल में लगभग एक वर्ष तक रही।लेकिन एक दिन भी उसके चेहरे पर मुस्कुराहट तक नहीं दिखी गई। वह अपने पति की बेटी को पालने में अपना सब कुछ लगा दी।दिन रात उसी के सेवा में लगी रहती।बदले में सौतेली मां होने का घर से बाहर वालों तक दंश झेलना पड़ता, उसके ऊपर पति का सनकी मिजाज।उसके आंखों से आंसू पूरे एक साल में शायद ही कोई दिन हो जब न निकली हो!
एक वर्ष के बाद जब अपने मायके लौटी तो पूरे मोहल्ले के लोग उसे देखने के लिए इकट्ठा हो गए। लेकिन रजिया चुपचाप दबे पांव अपने घर चली गई।भला उन लोगों को क्या पता रजिया के दिल पर क्या बीत रहा है।एक महिला ने उसे छेड़ने के इरादे से बोली रज्जो शादी के लड्डू हम लोगों को नहीं खिलाओगी क्या ? कहीं जीजा जी ने मना तो नहीं किया है ? चलो ठीक है हमें लड्डू नहीं चाहिए पर अपनी हंसी और खिलखिलाहट से तो हम लोग को वंचित मत करो,आखिर कौन सा गुनाह हम लोगों ने किया है तुम्हारी शादी कर के ? दहेज में सब कुछ दिया पर हम लोगों ने तुम्हारी हंसी और खिलखिलाहट तो उन्हें नहीं दी थी,जो तुम वहीं छोड़ के आ गई। इतना सुनते ही रजिया बिफर कर अपनी मां के आंचल में मुंह छुपा सुबकते हुए बोली आप लोगों की रज्जो शायद पिछले जन्म में कोई बहुत बड़ा गुनाह की थी इसलिए माता-पिता और भाइयों ने सनकी दोवाह लड़के से हमारी शादी कर दी।जहां मैं बिना बच्चे को जन्म दिये मां तो बन गई,पर एक दिन के लिए भी दुल्हन नहीं बन पाई,सिर्फ बच्चे के पालने वाली दाई रह गई दाई। इतना कह कर रजिया भोंकार पारकर रोने लगी। वहां उपस्थित सारे लोगों की आंखों से आंसू इस तरह उमड़ने लगे मानो एक साथ गंगा-यमुना में बाढ़ आ गई हो और वह एक बार में ही सब कुछ बहा कर ले जाने को बेताब है।

सामाजिक और राजनीतिक चिंतक
ग्राम देवदत्तपुर,पोस्ट एकौनी, थाना दाऊदनगर, जिला
औरंगाबाद, बिहार
पिनकोड 824113
मोबाइल न 9507341433

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