साहित्य

  • जन की बात न दबेगी, न छिपेगी, अब छपेगी, लोकतंत्र के सच्चे सिपाही बनिए अपने लिए नहीं, अपने आने वाले कल के लिए, आपका अपना भविष्य जहाँ गर्व से कह सके आप थे तो हम हैं।
  • लखीमपुर-खीरी उ०प्र०

Tuesday, August 25, 2020

भोजपुरी गानों में जातीयता के आंड़ में अश्लीलता

भोजपुरी गानों में जातीयता के आंड़ में अश्लीलता

मने पांडे जी के बेटा हैं तो किसियो को उठा के चुम्मा लीजियेगा. मने डर-भय नाम का कुछऊ मन में हयिये नहीं है का? देश कहाँ से कहाँ पहुँच गया अभी आप जातीय श्रेष्टता को साबित करने में लगे हैं. किसी के माँ-बहन बेटी के इज्जत का कोई मूल्य नहीं है. इसका असर समाज पर जानते हैं बहुत बुरा हुआ है अबरी के लड़की लोगन के जबरी पाण्डेय जी का बेटा है.... कह के अश्लील हरकत लोग करता था. अश्लीलता की श्रेणी में इहो आता है. कोई ठकुरईपन को गाने के रूप में परोस रहा है तो कोई बब्भनई के रूप में, आपको शोहरत मिल गया है तो

इसका मतलब आप जातीयता को बढ़ावा देंगे. आ फिर कहते हैं की #जाति_है_की_जाती_नहीं. आपसे पहले भी बहुत लोग गायक कलाकार हुए हैं- भिखारी ठाकूर, रघुवीर नारायण, विद्यापति, कुबेर नाथ मिश्र और धरीक्षण मिश्र नया में शारदा सिन्हा, मनोज तिवारी, विष्णु ओझा, भरत शर्मा, मदन राय और भी बहुत लोग हैं इनके में जातीयता की जगह लोक-समाज की आवाज दिखती विरह है. का ई लोग गायक नहीं है इनके दिमाग में नहीं आया था की ऐसा गाना गया जाये जेवना में ठकुरई-बब्भनई क गुडगान हो.

आपको स्टारडम के शीर्ष पर केवल आपही के जाति वाले पहुंचाए हैं? नहीं न. दूसरी जाति वाले आपको को छोड़ दें तब कहीं का नहीं रहियेगा, स्टारडम सब .....हेल जायेगा. रास्ता आपही देखाते हैं जब छोटा लोग दोहारने लगता तब चिचियाने लगते हैं. मने एक ठो ट्रेंड चल गया था. युटुब मैं पट गया था. बाबु साहब का बेटा...यादव जी का बेटा हूँ....चमार का बेटा हूँ........पासी......धोबी.....



 धानुक आदि-आदि मने न जाने का का. किसी ने तो गाने का जबाब इहाँ तक गा दिया कि पांडे जी बेटी हूँ...चिपक के चुम्मा......अब का करियेगा? मान-सम्मान दीजियेगा तभी न पाईयेगा. फ़िलहाल इसने भी गलत किया पाण्डेय जी की बेटी का क्या दोष है. खार खाए बैठे थे तो पाण्डेय जी को कोर्ट-कचहरी में घसीट देते...थोडा उनको भी बुझा जाता. यही होना भी चाहिए......आप ठाकुर जी हैं त ठकुरई के रोब में परोस रहें हैं #नजर मिलाओ बबुआन से..... इसका असर समाज पर क्या पड़ेगा जानते हैं? हमको तो लगता है कि अपराध बढ़ाने में सबसे जादा आपही लोग हैं. और भी बहुत कुछ लिखेके फ़िलहाल आज इतना ही.

अखिलेश कुमार अरुण


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