साहित्य

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  • लखीमपुर-खीरी उ०प्र०

Friday, June 30, 2023

वेदनाओं की मुखर अभिव्यक्ति है किन्नर कथा-सत्य प्रकाश ‘शिक्षक

पुस्तक समीक्षा



पुस्तक-इस दुनिया में तीसरी दुनिया 
(साझा लघुकथा संग्रह संपादक-डॉ. शैलेष गुप्त ‘वीर‘ एवं सुरेश सौरभ)  
मूल्य-249
प्रकाषन-श्वेतवर्णा प्रकाशन नई दिल्ली
प्रकाशन वर्ष-202

                संवेदनशील व्यक्ति आस-पास की घटनाओं को नजर अंदाज नहीं कर सकता, जो घटता है उसके मन पर गहरा असर डालता है। इस दुनिया में तीसरी दुनिया (‘किन्नर कथा) नामक लघुकथाओं के संकलन में रचनाकारों ने उन तमाम संवेदनाओं को अभिव्यक्त किया है जो प्रायः के अछूती रही हैं। घृणा, प्रेम, प्रतिशोध ग्लानि के ताने-बाने से चुनी संग्रह की लघुकथाओं में किन्नरों के प्रति जन सामान्य की, दुर्भावना साफ झलकती है। प्रस्तुत कृति मेें लेखक-लेखिकाओं ने अनुत्तरित मुद्दों को विमर्श प्रदान किया है। संग्रहीत 78 लघुकथाकारों की लघुकथायें जीवन के कटु सत्य को उजागर करती हैं। अंजू निगम की ‘आशीष‘ कथा में किन्नरों की सदाशयता प्रकट होती है-जब पता चलता है कि मुंडन संस्कार करा के लौटे परिवार का पर्स ट्रेन में चोरी हो चुका है, तो वे सोहर गा-बजाकर आशीष देते हुये बिना नेग लिये टोली के साथ बाहर निकल जाती हैं। अभय कुमार भारती की लघुकथा ‘फरिश्ते‘ में किन्नरों की टोली ट्रेन में जिस तरह जहर खुरानी के शिकार यात्री की मदद करती है, वह प्रशंसनीय है। दृष्टव्य है, जब सहयात्री एक-दूसरे का मुख ताकते रह जाते हैं तब किन्नरों की संवेदना काम आती है। इस प्रकार प्रस्तुत संकलन में योगराज प्रभाकर, डॉ. लता अग्रवाल, राहुल शिवाय, राम मूरत राही, विजयानंद विजय, राजेंद वर्मा, विभा रानी श्रीवास्तव,हर भगवान चावला, संतोष सुपेकर आदि रचनाकारों ने किन्नरों की संवेदनाओं का चित्रण एवं विश्लेषण उनके जीवन के विभिन्न पक्षों को ध्यान में रखकर बहुत ही कायदे से किया है। समीक्ष्य साझा संग्रह ‘इस दुनिया में तीसरी दुनिया‘ के सफल संयोजन व संपादन के लिये डॉ. शैलेष गुप्त ‘वीर‘ एवं सुरेश सौरभ जी को बहुत-बहुत बधाई। नयी राहों का यह संग्रह अन्वेषी बने ऐसी कामना है।
समीक्षक-सत्य प्रकाश ‘शिक्षक‘
पता-कीरत नगर टेलीफोन एक्सचेन्ज के पीछे लखीमपुर-खीरी पिन-262701
मो-7985222074


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