जब तक देश में रेडियो का प्रचलन रहा,तब तक घरों में बाल साहित्य प्रचुर मात्रा में पढ़ा जाता था। जब चंदा मामा, नंदन,चंपक, बालभारती जैसी पत्रिकाएं बच्चे ही नहीं बड़े भी चाव से पढ़ते थे, परन्तु भौतिकता की बढ़ती चकाचैंध में टीवी कम्प्यूटर,और स्मार्टफोन के घरों में प्रवेश होते ही, जब बचपन अनायास ही युवा और पौढ़ होता जा रहा है,तब बाल संवेदनाओं को बचाने के लिए बाल साहित्य की महती भूमिका बन जाती है। ऐसे में सिद्धहस्त लघुकथाकार सुरेश सौरभ की नवीनतम कृति बाल कथा संग्रह ‘पक्की दोस्ती‘ साहित्य जगत में कुछ आशा का संचार करती दिखाई पड़ती है। संग्रह की सभी 19 कहानियों में विविधता के साथ सरसता भी है, जो अपनी सहज भाषा शैली से पाठको का मन मोह लेने में समर्थ हैं। ये बाल कथाएँ मनोरंजन के साथ-साथ एक अदर्श भी प्रस्तुत करतीं हैं, जो बाल मन को भविष्य के लिए सुनागरिक बनने की प्रेरणा भी प्रदान करती हैं। इस संग्रह में ‘पापा जल्दी आ जाना‘ तथा ‘मैं अभिनंदन बनना चाहता हूँ‘ नामक कथाएँ देश प्रेम की प्रेरणा देती है,तो ‘पक्की दोस्ती‘ और ‘नन्दू सुधर गया‘ आदि कहानियाँ समझदारी के साथ नसीहत देती प्रतीत होती है। ‘पक्की दोस्ती‘ बाल कथा संग्रह से ऐसी प्रेरणा मिलती है, जिससे उनका बचपन असमय परिपक्व न हो, क्योंकि बचपन से ही बच्चा बना रहना, बाल संवेदनाओं और घर-परिवार, समाज और देश के लिए सुखदायी है।
सौरभ जी की रचनाएँ देश के प्रसिद्ध अखबारों पत्रिकाओं में प्रकाशित और चर्चित हो रहीं हैं। अस्तु आशा ही नहीं वरन पूर्ण विश्वास है कि श्वेतर्णा प्रकाशन दिल्ली से प्रकाशित सुरेश सौरभ की कृति ‘पक्की दोस्ती‘ हिन्दी साहित्य को समृ़द्ध करेगी।
पुस्तक-पक्की दोस्ती (बाल कहानी संग्रह)
लेखक-सुरेश सौरभ
प्रकाशन-श्वेतवर्णा प्रकाशन नई दिल्ली।
मूल्य-80रू
पृष्ठ-64
समीक्षक-सत्य प्रकाश ‘शिक्षक‘
पता-कीरत नगर टेलीफोन एक्सचेन्ज के पीछे लखीमपुर-खीरी पिन-262701
मो-7985222074